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Reading: वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की पत्रवार्ता……
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छत्तीसगढ़छत्तीसगढ़ जनसंपर्क

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की पत्रवार्ता……

admin
Last updated: 2026/09/01 at 10:03 PM
admin
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15 Min Read
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रायपुर: वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता, संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप विभागीय गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर आज छत्तीसगढ संवाद के  आडिटोरियम (नवा रायपुर,अटल नगर ) में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा और माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार “हरित छत्तीसगढ़, समृद्ध छत्तीसगढ़” के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए वन संरक्षण का अर्थ केवल वनों की सुरक्षा नहीं है। वनों के संरक्षण के साथ वनवासियों की समृद्धि, जनजातीय संस्कृति का संरक्षण, किसानों की आय में वृद्धि, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार, वन्यजीव संरक्षण तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से बेहतर वन प्रबंधन हमारी प्राथमिकताओं का हिस्सा हैं।

किसान वृक्ष मित्र योजना-किसान की आय के साथ हरियाली

मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि हमारी सरकार ने वृक्षारोपण को किसानों की आय से भी जोड़ा है। किसान वृक्ष मित्र योजना में पात्र नागरिकों को 5 एकड़ तक 100 प्रतिशत वित्तीय अनुदान तथा 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान दिया जाता है। पिछले दो वर्षों में 36 हजार 896 हितग्राहियों की 62 हजार 441 एकड़ कृषि भूमि में 3.675 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया है।

वनवासी परिवारों की समृद्धि हमारी पहली प्राथमिकता

छत्तीसगढ़ में जंगल और जंगल पर निर्भर समुदाय एक-दूसरे से अलग नहीं है, इसलिए हमारी सरकार ने वन संरक्षण के साथ-साथ वनोपज संग्राहकों की आय और उनकेपरिवारों के कल्याण को प्राथमिकता दी है। छत्तीसगढ़ में तेंपदूत्ता संग्र्रहण दर 5,500 प्रति मानक बोरा है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2025 में 11.44 लाख परिवारों द्वारा 13.85 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्र्रहण किया गया और 757 करोड़ का ऑनलाइन भुगतान किया गया। 7.14 लाख संग्राहकों को 153 करोड़ प्रोत्साहन पारिश्रमिक का भुगतान किया गया। 12.40 लाख महिला संग्राहकों को चरण पादुका वितरित की गई तथा वर्ष 2026 में 12.38 लाख पुरुष संग्राहकों को चरण पादुका का वितरण प्रस्तावित है।

श्री कश्यप ने बताया कि समर्थन मूल्य पर 36 हजार 580 क्विंटल वनोपज की खरीदी की गई, जिसमें संग्राहकों को राशि 16.66 करोड़ रूपए का आनलाईन भुगतान तथा 13 हजार से अधिक संग्राहक परिवारों को लाभ पहुंचा गया है। राजमोहिनी देवी सुरक्षा योजना में 1862 प्रकरणों में 26.08 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया। तेन्दूपदूत्ता संग्राहक परिवार के 8 हजार 533 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति योजनाओं के अन्तर्गत 12.07 करोड़ रूपए की छात्रवृत्ति दी गई। वर्ष 2026 में अबूझमाड़ में 13 नए तेंदूपत्ता फड़ प्रारंभ किए गए हैं।

रायपुर : वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप की पत्रवार्ता

महिला सशक्तिकरण वनोपज को आजीविका से जोड़ा

मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन एवं पीएम जनमन योजना के अंतर्गत लघु वघुनोपज के संग्रहण और प्रसंस्करण से 6 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों के 70 हजार से अधिक सदस्य लाभान्वित हुए हैं। वन धन केन्द्रों से जुडी महिला समूहों को 5 करोड़ से अधिक कमीशन दिया गया है। उन्होंने बताया कि वन धन केन्द्रों में 181 प्रकार के हर्बल उत्पादों का निर्माण किया गया है ,जिसका मूल्य राशि 4.42 करोड़ रूपए रहा। धमतरी जिले में महानदी तट एवं अनुपनुयोगी पंचायत भूमि की 120 एकड़ भूमि पर महिला समूहों द्वारा खस का रोपण किया गया है। गौरेला-पेन्ड्रा -मरवाही, बिलासपुरु, कांकेर, धमतरी और कोरबा के 65 ग्रामों की 1,854 महिलाओं द्वारा अपनी बाड़ियों में 64 हजार 798 सिंदूरी तथा 7 लाख 48 हजार 092 सतावर पौधे लगाए गए हैं।

बस्तर में शांति के साथ विकास और रोजगार की नई शुरुआत

श्री कश्यप ने बताया कि पिछले दो वर्षों में बस्तर अंचल के माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, इसका परिणाम यह है कि वन विभाग अब अति-संवेदनशील क्षेत्रों में भी वानिकी एवं विदोहन कार्य पुनः प्रारंभ कर रहा है। दंतेवाड़ा , सुकमा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर, कोण्डागांव एवं कांकेर के दूरूस्थ वनक्षेत्रों में इमारती लकड़ी एवं बांस विदोहन के कार्य किये जायेंगे। इमारती लकड़ी विदोहन, बांस विदोहन और अन्य कार्यो से कुल 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजन का अनुमान है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने के साथ पलायन कम करने तथा लोगों का जल, जंगल-जमीन और बस्तर की संस्कृति से जुड़ाव मजबूत करने का प्रयास है।

दूरस्थ वनांचलों में सड़क, मोबाइल और बुनियादी सुविधाएं

मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि वन संरक्षण के साथ हमारी सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि वन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और दूरसंचार जैसी मूलमूत सुविधाओं से वंचित न रहें। पीएम जनमन योजना के तहत 20 प्रकरणों में 58.002 हेक्टेयर एवं 99.995 किलोमीटर मार्ग के लिए अनुमनुति दी गई।

वन अधिकार अधिनियम, 2006 की धारा 3(2) के तहत 417 प्रकरणों में 1,300- 1,400 किलोमीटर मार्ग के लिए ग्रामसभा की अनुशंसा के बाद अनुमति जारी की गई।  वन संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम के तहत जिलों में बीएसएनएल के 62 में से 59 टावरों को रिकॉर्ड 70 दिनों में अनुमति प्रदान की गई है। विगत 2.5 वर्षों में विद्यालय, अस्पताल, आंगनबाड़ी , सड़क, विद्युत एवं दूरदूसंचार लाईन, पेयजल, सिंचाई, कौशल विकास एवं सामुदायिक केन्द्र सहित 13 प्रकार के विकास कार्यों के लिए वन अधिकार अधिनियम की धारा 3 (2) के तहत कुल 1168 प्रकरणों में वनभूमि के विपथन की कार्यवाही की गई।

वन्यजीव संरक्षण बाघों की संख्या 18 से बढ़कर 35

वनमंत्री श्री कश्यप ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2022 में प्रदेश में 18 बाघ थे, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 35 हो गए हैं। यह 94 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि है।2,829.387 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला गुरुघासीदास-तमोर पिंगला देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जिसकी अधिसूचना वर्ष 2024 में हुई।एनटीसीए द्वारा बांधवगढ़ से 3 बाघिनों के ट्रांसलोकेशन की अनुमनुति दी गई है। एनक्लोजर और पेट्रोलिंग कैंप तैयार हैं तथा बरसात के बाद स्थातनांरण किया जाना है।

कृष्ण मृग संरक्षण को माननीय प्रधानमंत्री जी से मिली सराहना

मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि  बारनवापारा अभयारण्य में कृष्ण मृगों की संख्सं 77 से बढ़कर 200 के पार पहुंच गई है। इस उपलब्धि की सराहना स्वयं माननीय प्रधानमंत्रीं श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 26 अप्रैल 2026 के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में की। वर्तमान में इन्द्रावती में हमारे राजकीय पशु वन भैंसे 14-17 प्राकृतिक रूप से मौजूद हैं तथा असम से लाए गए वन भैंसे की संख्या 6 से बढ़कर 11 हुई है। राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना की संख्या 800 से 900 दर्ज की गई है और ‘मैना मित्र’योजना के तहत 250 घोंसलों की पहचान की गई है। अचानकमार के औरापानी में वल्चर सेफ जोन विकसित किया गया है तथा इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में तीन प्रजातियों के 150 गिद्ध संरक्षित हैं।

मानव-हाथी द्वंद तकनीक और जनभागीदारी से समाधान

श्री कश्यप ने बताया कि मानव-हाथी द्वंद को कम करने के लिए ‘गज संकेत’ ऐप तथा ‘गजरथ यात्रा’ के माध्यम से तकनीक और सामुदायिक सहभागिता को जोड़ा गया है। हाथियों से जनहानि वर्षवार कम होते जा रहे हैं। 90 हाथी मित्र दलों के 545 प्रशिक्षित सदस्य गांव-गांव जाकर जागरूकता का कार्य कर रहे हैं। 12 अगस्त 2026, विश्व हाथी दिवस पर दरभा में गज संकेत’ ऐप का विमोचन किया गया। इस पहल को माननीय मुख्यमंत्री द्वारा राज्य स्तरीय सुशासन पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।

ईको-टूरिज्म-प्रकृति भी, प्रगति भी

वन एवं जनलवायु परिवर्तन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि प्रदेश में 240 प्राकृतिक पर्यटन केन्द्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें 50 से अधिक पर्यटन केर्न्द्र पूर्णतः स्वावलंबी हो चुके हैं। प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन केन्द्रों के लिए 2 करोड़ 60 लाख के प्रस्तावित लक्ष्य के विरुद्ध 2 करोड़ 21 लाख सकल आय दर्ज की गई है। बस्तर का धुड़मारास सामुदायिक पर्यटन का महत्वपूर्ण उदाहरण है, इससे 40 प्रत्यक्ष रोजगार और 20 अप्रत्यक्ष रोजगार एवं 5 कमरे का ‘धुर्वाडेरा’ होमस्टे बनाया गया है। महासमुंद के शिशुपाल इको ट्रेल को 45 लाख की लागत से विकसित किया गया है। यहां अब तक 832 मानव-दिवस 15 नियमित आजीविका सृजित हुई है। कवर्धा सफारी माडल  में 35 कि.मी. लंबा नया सफारी मार्ग विकसित किया गया है। चक्रीय निधि से खरीदे गये 4ग्4 सफारी वाहनों का संचालन सीधे स्थानीय ईडीसी (थावरझोल) द्वारा किया जा  रहा है।

बस्तर की संस्कृति और जनजातीय आस्था का संरक्षण

मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि बस्तर की संस्कृति जंगलों और प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई है। इसलिए वन संरक्षण के साथ जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी हमारी जिम्मेदारी है।  पिछले2.5 वर्षों में 19.05 करोड़ व्यय कर वन क्षेत्रों में 572 देव गुड़ियों का निर्माण और जीर्णाेद्धार किया गया है। ग्राम गढ़बेंगाल, नारायणपुर में बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक संस्था ‘घोटुल’ के संरक्षण की दिशा में कार्य किया गया है।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को विश्व स्तर पर पहचान

श्री कश्यप ने बताया कि वर्ष 2025 में 200 वर्ग किलोमीटर में फैले कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया गया। यह गुफा, तीरथगढ़ जैसे जलप्रपातों और समृद्ध जैव-विविधता का अद्वितीय केन्द्र है। कांगेर घाटी में चक्रीय निधि से 35 जिप्सी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे 200 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। 18 हितग्राही ऋण पूर्णतः चुका चुके हैं।

संयुक्त वन प्रबंधन समितियां- संरक्षण का लाभ सीधे ग्रामीणों तक

मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि वन प्रबंधन समितियों की लाभांश राशि से मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, बकरी पालन, अदरक खेती, नीलगिरी रोपण और अगरबत्ती निर्माण जैसी आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। 78 तालाबों मेंसघन मत्स्य पालन किया गया और 30 जून 2026 तक लगभग 3,200 क्विंटल मछली उत्पादन हुआ है। पिछले ढाई वर्षों में चक्रीय निधि से 2,170.15 लाख ऋण प्रदान किया गया है, जिससे 700 परिवार लाभान्वित हुए हैं।

छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट 

मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि कोपरा जलाशय, बिलासपुर को राज्य का पहला रामसर साइट घोषित किया गया है। Vision@2047 के तहत वर्ष 2030 तक 20 रामसर साइट बनाने का लक्ष्य है। 2.25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाली 11,096 आर्द्रभूमियों की ग्राउंड ट्रूथिंग एवं बाउंड्री डिमार्केशन पूर्ण की गई है। प्रदेश में 500 से अधिक वेटलेंडमित्र कार्यरत हैं।  BMC के 105 युवाओं को पैराटेक्सोनामी प्रशिक्षण दी गई है।

वैज्ञानिक वन प्रबंधन और अनुसंधान

मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि 17 वनमंडलों में 911 सरना का चिन्हांकन एवं प्रलेखन किया गया है, जिनका कुल क्षेत्रफल 2,928.16 हेक्टेयर है। राज्य भर में 240 प्रवासी पक्षी प्रजातियों का डेटाबेस तैयार किया गया है। 7 जिलों में 5 हेक्टेयर सेअधिक वाली 283 आर्द्रभूमियों का सर्वेक्षण किया गया है। 1 हेक्टेयर में 13 विभिन्न बांस प्रजातियों के 120 पौधों का बैम्बू सेटम स्थापित किया गया है। चंदन के 14 वर्ष पुराने प्रायोगिक रोपण के अध्ययन में 33 प्रतिशत हार्डवुड कंटेंट पाया गया है तथा वृक्षारोपण सफल पाया गया है। पिछले दो वर्षों में 72 जैविक प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं,जिससे 4,057 संग्राहक एवं 21,471 किसान लाभान्वित हुए हैं। 24 जिलों के 6,140 पारंपरिक वैद्यों को 10 सम्मेलनों के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया है तथा हर्बल प्रसंस्करण के लिए 45 ग्राइंडिंग मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। जामगांव, जिला दुर्ग में राशि 94.75 करोड़ रूपए की लागत से राष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेदिक औषधि निर्माण केन्द्र की स्थापना की गई है।

आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित वन प्रशासन

मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि छ.ग शासन के निर्देशानुसार वन विभाग के अन्तर्गत होने वाली भुगतान प्रक्रिया का पूरी तरह से एंड-टू-एंड डिजिटाईजेशन कर दिया गया है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर और ई-कोष प्लेटफार्म के साथ सफलता पूर्वक एकीकृत किया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,520 करोड़ से अधिक का ऑनलाइन भुगतान किया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 तक 209 करोड़ का ऑनलाइन भुगतान किया गया है। SPARROW में  8,975 अधिकारी-कर्मचारी आनबोर्ड किए गए तथा 9,464 PAR जनरेट किए गए हैं।  eHRMS में 32,869 अधिकारी एवं कर्मचारी आनबोर्ड हैं।  मुख्यालय से लेकर समस्त वनमंडल स्तर तक ई आफिस शत-प्रतिशत लागू किया गया है।  iGOT कर्मयोगी में 9,230 अधिकारी एवं कर्मचारी आनबोर्ड हैं। वनों की अग्नि दुर्घटना से सुरक्षित रखने हेतु अत्याधुनिक फारेस्ट फायर अलर्ट एवं मानिटरिंग सिस्टम संचालित है, जिससे नियर रियल टाइम अलर्ट जारी होते हैं, रिस्पॉन्स टाइम 1-2 घंटे से घटकर 5-10 मिनट हो गया है तथा इसे बीट स्तर तक विस्तारित किया जा रहा है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप की पत्रवार्ता-pdf

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