By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept

Sarvam News

Latest & Breaking News Updates In Hindi

  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • मध्यप्रदेश
    • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
  • छत्तीसगढ़
    • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
  • उत्तराखंड
  • राजनीती
  • धर्म
  • अन्य खबरें
    • मनोरंजन
    • खेल
    • तकनीकी
    • व्यापार
    • करियर
    • लाइफ स्टाइल
Search
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Reading: जंगल से बाजार तक पहुंचा महुआ, CM विष्णु देव साय की पहल से जशपुर में बदली तस्वीर; जनजातीय परिवारों और महिला समूहों को मिल रही नई आजीविका…..
Share
Sign In
Notification Show More
Font ResizerAa

Sarvam News

Latest & Breaking News Updates In Hindi

Font ResizerAa
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तराखंड
  • राजनीती
  • धर्म
  • अन्य खबरें
Search
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • मध्यप्रदेश
    • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
  • छत्तीसगढ़
    • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
  • उत्तराखंड
  • राजनीती
  • धर्म
  • अन्य खबरें
    • मनोरंजन
    • खेल
    • तकनीकी
    • व्यापार
    • करियर
    • लाइफ स्टाइल
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Sarvam News > Blog > राज्य > छत्तीसगढ़ > छत्तीसगढ़ जनसंपर्क > जंगल से बाजार तक पहुंचा महुआ, CM विष्णु देव साय की पहल से जशपुर में बदली तस्वीर; जनजातीय परिवारों और महिला समूहों को मिल रही नई आजीविका…..
छत्तीसगढ़छत्तीसगढ़ जनसंपर्क

जंगल से बाजार तक पहुंचा महुआ, CM विष्णु देव साय की पहल से जशपुर में बदली तस्वीर; जनजातीय परिवारों और महिला समूहों को मिल रही नई आजीविका…..

admin
Last updated: 2026/09/22 at 10:06 PM
admin
Share
9 Min Read
SHARE

रायपुर: कभी जंगलों में सहज रूप से मिलने वाली वन उपज और पारंपरिक उपयोग तक सीमित महुआ आज नए रूप, नई पहचान और नई संभावनाओं के साथ बाजार तक पहुंच रहा है। जशपुर में महुआ को केवल वन उपज के रूप में नहीं, बल्कि खाद्य नवाचार, मूल्य संवर्धन, अनुसंधान और जनजातीय आजीविका के अवसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्थानीय संसाधनों को आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने महुआ की पहचान को नई ऊंचाई दी है।

 जंगल की महक से बाजार की पहचान तक पहुंचा महुआ

इसी बदलाव की झलक रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में आयोजित 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में देखने को मिली, जहां जशप्योर और जय जंगल के स्टॉल पर जशपुर के महुआ आधारित उत्पादों ने आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया। 18 से 20 सितंबर तक आयोजित इस मेले में बड़ी संख्या में लोगों ने महुआ से तैयार विभिन्न खाद्य उत्पादों को देखा, उनके बारे में जानकारी ली और उनकी गुणवत्ता, स्वाद तथा आधुनिक पैकेजिंग की सराहना की।

महुआ की बदली तस्वीर, पारंपरिक वन उपज से आधुनिक फूड प्रोडक्ट तक

महुआ का नाम सुनते ही लंबे समय तक लोगों के मन में इसकी पारंपरिक उपयोगिता की ही तस्वीर उभरती रही। जशपुर में इसी धारणा को बदलते हुए महुआ को आधुनिक खाद्य उत्पादों के रूप में विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है। अब महुआ केवल जंगल से संग्रहित होने वाली वन उपज नहीं, बल्कि प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन के जरिए बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने वाला उत्पाद बन रहा है।

इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर के हॉल नंबर-3 के स्टॉल नंबर 4 एवं 5 पर महुआ नेक्टर, महुआ नेक्टर गोल्ड, वन्यप्राश, महुआ एनर्जी पाचक, महुआ टी, महुआ आधारित कुकीज़, रागी-महुआ उत्पाद, महुआ लड्डू और फूड-ग्रेड महुआ फूल सहित अनेक उत्पाद प्रदर्शित किए गए। उत्पादों की विविधता के साथ उनकी आकर्षक पैकेजिंग और आधुनिक प्रस्तुति ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि जंगलों से मिलने वाला पारंपरिक महुआ आधुनिक खाद्य बाजार में इतने नए रूपों में भी अपनी जगह बना सकता है।

कई आगंतुकों ने पहली बार महुआ को इतने विविध खाद्य स्वरूपों में देखा। उत्पादों की प्रस्तुति और स्वाद ने यह संदेश दिया कि यदि स्थानीय संसाधनों को उचित तकनीक, गुणवत्ता और बाजार की समझ के साथ जोड़ा जाए, तो ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की पारंपरिक उपज भी व्यापक बाजार तक पहुंच सकती है।

जशप्योर बना स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन का माध्यम

जशपुर की पहचान केवल अपने जंगलों और प्राकृतिक संपदा से नहीं, बल्कि यहां के लोगों के पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय संसाधनों से भी जुड़ी है। इसी स्थानीय ताकत को आर्थिक अवसरों में बदलने की दिशा में जशप्योर के माध्यम से कार्य किया जा रहा है।

 जंगल की महक से बाजार की पहचान तक पहुंचा महुआ

जिला प्रशासन, स्थानीय समुदाय, महिला समूहों, उत्पादक संस्थाओं और तकनीकी संस्थानों के साझा प्रयासों से महुआ सहित स्थानीय वन उपज के संग्रहण, प्रसंस्करण, उत्पाद विकास और बाजार से जुड़ाव पर काम हो रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय संसाधनों को स्थानीय स्तर पर ही अधिक मूल्यवान बनाना और उनसे जुड़े परिवारों के लिए बेहतर आजीविका के अवसर तैयार करना है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्थानीय एवं जनजातीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन और उन्हें व्यापक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। जशपुर में महुआ को लेकर हो रहे प्रयास इसी सोच को जमीन पर साकार करते हुए दिखाई देते हैं।

पेड़ से बाजार तक तैयार हो रही पूरी वैल्यू चेन

महुआ की कहानी केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे पेड़ से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने का प्रयास है। स्वच्छ और फूड-ग्रेड संग्रहण से लेकर डिहाइड्रेशन, प्रसंस्करण, अनुसंधान, गुणवत्ता सुधार, उत्पाद विकास, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक प्रत्येक चरण को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

जिला प्रशासन जशपुर के सहयोग से संचालित Mahua Centre of Excellence और ‘Mahua Kosh’ में महुआ के खाद्य उपयोग, नए उत्पादों, फूड-ग्रेड कलेक्शन, डिहाइड्रेशन और प्रसंस्करण तकनीक सहित विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान एवं प्रयोग किए जा रहे हैं।

इन प्रयासों का व्यापक उद्देश्य महुआ की गुणवत्ता और बाजार मूल्य बढ़ाने के साथ इससे जुड़े जनजातीय परिवारों और महिला स्वसहायता समूहों के लिए आय के नए अवसर तैयार करना है। जब जंगल में संग्रहित होने वाली उपज को वैज्ञानिक तरीके से तैयार कर बाजार तक पहुंचाया जाता है, तो उसका लाभ केवल अंतिम उत्पाद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी मूल्य श्रृंखला से जुड़े लोगों तक पहुंचने की संभावना बनती है।

पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ रही नई पीढ़ी

इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में जशप्योर एवं जय जंगल के स्टॉल का प्रतिनिधित्व जशपुर की अनेश्वरी भगत और गणपति बाई कर रही थीं। वे आगंतुकों को केवल उत्पादों की जानकारी ही नहीं दे रही थीं, बल्कि यह भी बता रही थीं कि महुआ का संग्रहण किस तरह किया जाता है, उसे फूड-ग्रेड बनाने के लिए किन प्रक्रियाओं को अपनाया गया है और किस प्रकार पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक फूड प्रोसेसिंग से जोड़ा जा रहा है।

यह तस्वीर जशपुर में हो रहे बदलाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैकृजहां जंगल से जुड़ा पारंपरिक ज्ञान अब आधुनिक उत्पाद विकास और बाजार की जरूरतों के साथ जुड़ रहा है।

अनुसंधान से पोषण की नई संभावनाओं की तलाश

महुआ के खाद्य उपयोग के विस्तार के साथ इसके पोषण संबंधी पहलुओं पर भी अनुसंधान की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। जय जंगल के निदेशक समर्थ जैन ने बताया कि ग्राहकों से महुआ के सेवन के बाद आयरन और हीमोग्लोबिन से जुड़े सकारात्मक अनुभवों की बातें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन अनुभवों को वैज्ञानिक रूप से समझना जरूरी है और महुआ में आयरन की मात्रा के साथ शरीर में उसकी उपलब्धता एवं उपयोगिता का व्यवस्थित अध्ययन अगला महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक अध्ययन इन अनुभवों के पीछे ठोस आधार स्थापित करते हैं, तो महुआ पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण वन उपज के रूप में नई संभावनाएं प्रस्तुत कर सकता है। उनका प्रयास जशपुर के जंगलों में उपलब्ध इस वन उपज को अनुसंधान, बेहतर प्रसंस्करण और नए उत्पादों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाना है।

जशपुर के जंगलों से देश-दुनिया तक पहुंचने की राह

14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में जशपुर के महुआ उत्पादों को मिली प्रतिक्रिया केवल किसी एक उत्पाद की लोकप्रियता की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है जिसमें स्थानीय संसाधन, जनजातीय परंपरा, महिला समूहों की भागीदारी, प्रशासनिक सहयोग, तकनीकी ज्ञान और उद्यमिता एक साथ आकर नई आर्थिक संभावनाओं का निर्माण कर रहे हैं।

जशपुर का महुआ अब जंगलों में बिखरी वन संपदा भर नहीं है। यह स्थानीय ज्ञान, मेहनत और नवाचार के साथ एक ऐसे उत्पाद के रूप में आगे बढ़ रहा है, जो जनजातीय परिवारों और महिलाओं के लिए आजीविका के अवसरों का माध्यम बन सकता है।

जशपुर के जंगलों से निकलकर महुआ अब बाजार की नई भाषा बोल रहा है-स्थानीय संसाधन से मूल्य संवर्धन, पारंपरिक ज्ञान से नवाचार और वन उपज से आजीविका तक। यही बदलाव जशपुर के महुआ को नई पहचान दे रहा है।

You Might Also Like

कोरबा के प्रथम पीपल-वट उद्यान में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने किया वृक्षारोपण, पीपल-वट उद्यान को हरा-भरा एवं आकर्षक बनाने के साथ बच्चों के लिए मनोरंजन सुविधाएं विकसित करने पर दिया जोर….

सेवा की कहानी : हर बच्चे के विकास पर नजर, समय पर मिल रही सही सलाह और विशेषज्ञ सेवाएं, पोषण माह 2026 में बच्चों के विकास की निगरानी और देखभाल पर विशेष जोर…..

‘सेवा संकल्प अभियान शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम – उप मुख्यमंत्री अरुण साव…..

डिजिटल और पारदर्शी राजस्व प्रशासन : जनहित में सुशासन का नया अध्याय…..

छत्तीसगढ़ की दूरियां घटेंगी, विकास की रफ्तार बढ़ेगी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय….

admin September 22, 2026 September 22, 2026
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Previous Article छत्तीसगढ़ की दूरियां घटेंगी, विकास की रफ्तार बढ़ेगी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय….
Next Article डिजिटल और पारदर्शी राजस्व प्रशासन : जनहित में सुशासन का नया अध्याय…..
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

12945/ 26

Image
- Advertisement -
Ad imageAd image

Stay Connected

235.3k Followers Like
69.1k Followers Follow
11.6k Followers Pin
56.4k Followers Follow
136k Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow

ताजा ख़बरें

कोरबा के प्रथम पीपल-वट उद्यान में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने किया वृक्षारोपण, पीपल-वट उद्यान को हरा-भरा एवं आकर्षक बनाने के साथ बच्चों के लिए मनोरंजन सुविधाएं विकसित करने पर दिया जोर….
छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
सेवा की कहानी : हर बच्चे के विकास पर नजर, समय पर मिल रही सही सलाह और विशेषज्ञ सेवाएं, पोषण माह 2026 में बच्चों के विकास की निगरानी और देखभाल पर विशेष जोर…..
छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
‘सेवा संकल्प अभियान शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम – उप मुख्यमंत्री अरुण साव…..
छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
डिजिटल और पारदर्शी राजस्व प्रशासन : जनहित में सुशासन का नया अध्याय…..
छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ जनसंपर्क

उत्तराखण्ड

संपादक - AJAY SUNEJA
मोबाइल -8958810770
ईमेल - [email protected]
कार्यालय - 53/2, BLOCK-B, RISHI VIHAR, MEHUWALA MAFI, PIN CODE-248001, DISTT.-DEHRADUN, UTTARAKHAND.

Archives

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  
« Aug    
Follow US
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
  • Home
  • About Us
  • Contact Us
  • MP Info RSS Feed
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?