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Sarvam News > Blog > राज्य > मध्यप्रदेश > मध्यप्रदेश जनसंपर्क > MP News: मुख्यमंत्री यादव की दूरदर्शी सोच के साथ मध्यप्रदेश में वर्षा जल की बूंद-बूंद बचाने का “जल गंगा संवर्धन” महा अभियान होगा शुरू…
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MP News: मुख्यमंत्री यादव की दूरदर्शी सोच के साथ मध्यप्रदेश में वर्षा जल की बूंद-बूंद बचाने का “जल गंगा संवर्धन” महा अभियान होगा शुरू…

Last updated: 2025/03/27 at 5:39 PM
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8 Min Read
MP News: मुख्यमंत्री यादव की दूरदर्शी सोच के साथ मध्यप्रदेश में वर्षा जल की बूंद-बूंद बचाने का “जल गंगा संवर्धन” महा अभियान होगा शुरू…
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भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी सोच के साथ मध्यप्रदेश में वर्षा जल की बूंद-बूंद बचाने का “जल गंगा संवर्धन” महा अभियान गुड़ी पड़वा के दिन 30 मार्च से शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन स्थित क्षिप्रा तट पर वरुण (जल देवता) पूजन और जलाभिषेक के साथ “जल गंगा संवर्धन अभियान” का विधिवत शुभारंभ करेंगे। यह प्रदेशव्यापी अभियान ग्रीष्म ऋतु में 30 जून तक 90 दिन से अधिक समय तक लगातार चलेगा। 

पानी दे, गुरुबाणी दे। जल बिन सब सूना है। जो सबको जीवन दे, वो है जल। जल ही जीवन है। इससे हम आज सुरक्षित है, इसी से हमारा कल भी सुरक्षित है। जल बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। जल संरक्षण के लिए सिर्फ सरकार ही नहीं, समाज को भी आगे आना होगा। इसी मंशा से मध्यप्रदेश सरकार जल गंगा जल संवर्धन महा अभियान प्रारंभ करने जा रही है।

इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव हर दिन एक छोटी-बड़ी जल संरचना को लोकार्पित करेंगे। उन्होंने कहा है कि जल संरक्षण के इस अभियान से प्रदेश में भूजल स्तर में सुधार आएगा। पानी की बूंद-बूंद बचाएं, तभी हमारी सांसें बचेंगी। मध्यप्रदेश सरकार जन, जल, जंगल, जमीन और वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का जल संरक्षण अभियान देशभर में एक व्यापक जन-आंदोलन बना है। राज्य सरकार भी ‘खेत का पानी खेत में-गांव का पानी गांव में’ के सिद्धांत पर जल संरक्षण की दिशा में अभियान चला रही है।

हमारी धरा के कुल जल का केवल एक छोटा हिस्सा ही पीने योग्य स्वच्छ जल के रूप में उपलब्ध है। पृथ्वी के कुल जल का लगभग 97 प्रतिशत महासागरों में खारा जल है, जो पीने योग्य नहीं है। शेष 3 प्रतिशत मीठा जल है, लेकिन इसमें से भी अधिकांश हिमखंडों और बर्फ की चोटियों में जमा है। सिर्फ 0.5 प्रतिशत से भी कम पानी झीलों, नदियों और भूजल के रूप में उपलब्ध है, जिसे हम उपयोग कर सकते हैं। पृथ्वी पर स्वच्छ और पीने योग्य पानी की मात्रा बहुत ही सीमित है और इसे संरक्षित करना बेहद ज़रूरी है। इसीलिए मध्यप्रदेश सरकार ने जल बचाने के लिए कदम बढ़ाये हैं।

जल बचाने लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा अभियान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “जल गंगा संवर्धन अभियान” में जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार का यह अभियान जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देकर अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ें। उन्होंने कहा कि “जल गंगा संवर्धन अभियान”, प्रदेश में जल संकट को खत्म करने और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में मील का पत्थर सिद्ध होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रदेशव्यापी जल संवर्धन अभियान में जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, पर्यावरण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्कूल शिक्षा, उद्यानिकी एवं कृषि सहित 12 से अधिक अन्य विभाग एवं प्राधिकरण साथ मिलकर जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार के कार्य करेंगे। अभियान की थीम ‘जन सहभागिता से जल स्त्रोतों का संवर्धन एवं संरक्षण’ रखी गई है।

नागरिकों के सहयोग से जल संरक्षण अभियान बनेगा जन-आंदोलन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संचय की विभिन्न गतिविधियां संचालित करने जैसे – पौध-रोपण, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम चलाने, स्कूलों में बच्चों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने, ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, नदियों पर छोटे बांध निर्माण एवं नदियों के संरक्षण के लिए जलधारा के आसपास फलदार पौधों के रोपण और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रमुख चौराहों पर प्याऊ की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से भी अपील की है कि वे जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय योगदान दें और प्रदेश में अभियान के दौरान इसे एक को जन-आंदोलन बनाएं।

“जल गंगा संवर्धन अभियान” में होंगे कई महत्वपूर्ण कार्य

  • पंचायत स्तर पर तालाबों के निर्माण, वन्य जीवों के लिए वन क्षेत्र और प्राणी उद्यानों में जल संरचनाओं के पुनर्विकास के कार्य किये जायेंगे।

  • अभियान के 90 दिनों में प्रदेश की 90 लघु एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण होगा।

  • नदियों में जलीय जीवों को पुनर्स्थापित करने की संभावनाएं तलाशेंगे।

  • लघु एवं सीमांत किसानों के लिए 50 हजार नए खेत-तालाब बनाए जाएंगे।

  • ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व के तालाबों, जल स्त्रोतों एवं देवालयों में कार्य किए जाएंगे।

  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 1000 नए तालाबों का निर्माण करेगा।

  • प्रदेश की 50 से अधिक नदियों के वॉटर शेड क्षेत्र में जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य होंगे।

  • नदियों की जल धाराओं को जीवित रखने के लिए गेबियन संरचना, ट्रेंच, पौध-रोपण, चेकडैम और तालाब निर्माण पर जोर दिया जायेगा।

  • नर्मदा परिक्रमा पथ का चिन्हांकन कर जल संरक्षण एवं पौध-रोपण की कार्य योजना तैयार होगी।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में पानी चौपाल आयोजित होंगी। स्थानीय लोगों को जल संरचनाओं के रख-रखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

  • प्रत्येक गांव से 2 से 3 महिला-पुरुष का चयन कर प्रदेश में 1 लाख जलदूत तैयार किए जाएंगे।

  • सीवेज का गंदा पानी जल स्त्रोतों में न मिले, इसके लिए सोख पिट निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा।

  • नहरों के संरक्षण, जलाशयों से रिसाव रोकने, तालाबों की पिचिंग, बैराज मरम्मत कार्य होंगे।

  • नगरीय विकास एवं आवास विभाग 54 जल संरचनाओं के संवर्धन का कार्य करेगा।

  • नहरों को मार्क कर विलेज-मेप पर “शासकीय नहर” के रूप में अंकित किया जाएगा।

  • बांध तथा नहरों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। करीब 40 हजार किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली के सफाई कार्य।

  • फ्लशबार की मरम्मत कार्य किए जाएंगे। स्लूस-वैल की सफाई कार्य भी इसी अभियान के दौरान होंगे।

  • सदानीरा फिल्म समारोह, जल सम्मेलन, प्रदेश की जल परंपराओं पर आख्यान, चित्र प्रदर्शनी समेत विभिन्न आयोजन किये जायेंगे।

“जल गंगा संवर्धन अभियान”-वर्ष 2024

गत वर्ष 5 से 30 जून 2024 तक “जल गंगा संवर्धन अभियान” चलाया गया था। इस अवधि में 1056 करोड़ की लागत से 38 हजार 851 कार्य किए गए। 302 करोड़ से अधिक राशि 21 हजार 577 जीर्णोद्धार/सुधार कार्यों पर खर्च की गई थी। वर्ष 2024 में 5672 पुरानी बावड़ियों एवं कुओं का जीर्णोद्धार किया गया। 93 करोड़ रुपए की लागत से 3751 नए कुएं निर्मित किए गए थे।

साथ ही 7709 तालाबों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार पर 616 करोड़ की राशि खर्च हुए थे। इसी प्रकार 2925 चेक डैम एवं स्टॉप डैम निर्माण एवं जीर्णोद्धार में 119 करोड़ रुपए की लागत आई। 7158 रिचार्ज पिट और रीचार्ज शॉफ्ट निर्माण एवं जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण किया गया। अन्य जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों में लगभग 458 करोड़ रुपए की लागत से 30 हजार से अधिक कार्य हुए थे।

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